बुलंदशहर, मार्च 22 -- मानव जीवन अनमोल है, लेकिन यह अक्सर माया और मृग तृष्णा की भेंट चढ़ जाता है। जब तक जीव के भीतर अहंकार रहेगा उसे दुख और अपमान के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। कथाव्यास ने भक्तों को प्रह्लाद, ध्रुव और माता शबरी के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि आज का इंसान 'चिंता' के मकड़जाल में फंसा हुआ है, जबकि सच्चा समाधान केवल प्रभु के चिंतन में ही निहित है। नगर की आवास विकास प्रथम कॉलोनी में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में वृंदावन से आए कथाव्यास राहुल कृष्ण महाराज ने यह विचार रखे। उन्होंने कहा की भक्त प्रह्लाद और ध्रुव ने कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर का चिंतन नहीं छोड़ा, जिसके फलस्वरूप भगवान स्वयं उनके पास आए और उन्हें मुक्ति का मार्ग मिला। वक्ताओं ने पौराणिक कथाओं के माध्यम से समझाया कि मोह और अहंकार बड़े-बड़ों का पतन कर देते हैं।...
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