चार अक्टूबर को होगा जीवित पुत्रिका का निर्जला उपवास
गिरडीह, सितम्बर 28 -- गिरिडीह। जीवित पुत्रिका (जिउतिया) व्रत की तिथि को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से रविवार को विश्वेश ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, गिरिडीह में एक विशेष विद्वत् गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य गौड़ मत एवं मैथिल निबंध-निर्णय ग्रंथों का अध्ययन कर शास्त्रसम्मत तिथि निर्धारित करना था। सभागार में उपस्थित विद्वानों ने पंचांगीय सिद्धांतों और उदया तिथि की व्याप्ति पर गहन विचार-विमर्श किया। गोष्ठी में सर्वसम्मति से हेमन्त कुमार पाठक को अध्यक्ष चुना गया। शास्त्रीय संदर्भों का हवाला देते हुए विद्वानों ने स्पष्ट किया कि जीवित पुत्रिका व्रत का अनुष्ठान उदया अष्टमी तिथि में ही किया जाना चाहिए। यह भी पढ़ें- 3 को मनेगा जीवित्पुत्रिका व्रत, 4 को सुबह 7:30 के बाद होगा पारण सप्तमी से बिद्ध (सप्तमी-युक...
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