जमशेदपुर, मार्च 26 -- जमशेदपुर। साकची स्थित जैन भवन में आयोजित ओली पर्व के उपलक्ष्य में सत्संग सभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य डॉ. पद्मराज स्वामी जी महाराज ने आज कहा कि मनुष्य जीवन में चारित्र ही प्रधान है, किन्तु वही चारित्र जो सम्यक ज्ञान से प्रगट हो। ज्ञान हीन चारित्र का कोई मूल्य नहीं है। वस्तुत: चरित्र ही हमें शरीर की परिधि से निकालकर आत्मा के क्षेत्र में पहुंचाता है। और आत्मबोध हो जाना ही यथार्थ ज्ञान है। आचार्य जी ने बताया कि ओली पर्व के तीसरे दिन नमो आयरियाणं पद की साधना की जाती है। यह साधना पीले रंग के साथ सम्बंधित है और हमारे चारित्र को मजबूती प्रदान करती है। वस्तुत: यह हमारे जीवन में स्थायित्व को बढ़ाने वाली साधना है। इसके द्वारा साधक अपने शरीर में होने वाले पीले तत्वों की कमी को भर लेता है। यह संचालन की शक्ति का रंग है। चूंकि ...