बरेली, जुलाई 22 -- श्रावण मास की फुहारों के साथ आध्यात्मिक जीवन का सबसे अनुशासित और पावन काल दस्तक देने जा रहा है। 25 जुलाई से चातुर्मास का शुभारंभ होगा, जो 20 नवबंर को देवात्थान एकादशी तक चलेगा। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक इस चार माह की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यवसाय जैसे मांगलिक कार्यों पर स्वाभाविक विराम लग जाएगा। पंडित सुशील पाठक ने बताया कि चातुर्मास सिर्फ पंचांग का धार्मिक काल नहीं, आत्मसंयम, प्रकृति के साथ सामंजस्य और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। इस अवधि में संयमित जीवन, इंद्रियों पर नियंत्रण, सात्विक आहार और ईश्वर भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है। यह भी पढ़ें- देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा, इस वीक 22 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक के व्रत और पर्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द...