चातुर्मास के चार माह तक स्थिर हो जाते हैं संन्यासी, होता है स्वयं को मांजने का समय
बहुश्रुत जयमुनि, जुलाई 28 -- Chaturmas 2026: जीवन का विभाजन तीन अवस्थाओं में किया जाता है- बचपन, यौवन और वार्धक्य। वर्ष का विभाजन तीन ऋतुओं में किया गया है बरसात, सर्दी और गर्मी। वर्षा में प्रकृति अपनी सारी संपदाएं पृथ्वी पर न्योछावर करती है। सर्दी में उन संपदाओं का संरक्षण होता है तथा गर्मी में उन सबका क्षरण होता है या प्रकृति द्वारा हरण होता है। प्रकृति की उस अमूल्य संपदा को जल कहते हैं। इस ऋतु में आसमान बादलों के जरिये पृथ्वी की गोद भरता है। इस समय साधक, ऋषि गण अपनी बाहरी यात्राओं को स्थगित कर आध्यात्मिक यात्रा पर गतिमान हो जाते हैं। भारतीय परंपरा के विविध संन्यासी (वैदिक, जैन और बौद्ध) चार माह तक स्थिर हो जाते हैं। उनके लिए यह काल चातुर्मास या वर्षावास कहलाता है। वर्षावास के चार महीनों के नाम श्रावण-भाद्रपद-आश्विन एवं कार्तिक हैं। पहल...
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