नई दिल्ली, मार्च 1 -- सफलता और समृद्धि हर इंसान का सपना होता है, लेकिन कई लोग इसे हासिल नहीं कर पाते हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में एक ऐसे अवगुण की ओर इशारा किया है, जो व्यक्ति को विद्या से दूर कर देता है और धीरे-धीरे तंगहाली का कारण बन जाता है। यह अवगुण है आलस्य। चाणक्य नीति के अनुसार, आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह ना केवल शिक्षा से वंचित करता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में पिछड़ने का कारण बनता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आलस्य कैसे विद्या को नष्ट करता है और इससे मुक्ति के उपाय क्या हैं।आलस्य विद्या का सबसे बड़ा शत्रु चाणक्य कहते हैं कि आलसी व्यक्ति कभी गहन विद्या प्राप्त नहीं कर सकता है। आलस्य के कारण वह पढ़ाई को टालता रहता है। समय बीतता जाता है, लेकिन प्रयास नहीं होता है। जिसके कारण उसका ज्ञान अधूरा रह जाता है। विद्...
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