मुंबई, जनवरी 28 -- अजित पवार के प्लेन क्रैश में निधन के चलते महाराष्ट्र के राजनीतिक जगत को बड़ा सदमा लगा है। वह एक कुशल प्रशासक माने जाते थे तो वही उनकी मित्रता दलीय सीमा से हमेशा ही परे रही। देवेंद्र फडणवीस भले ही भाजपा के नेता हैं, लेकिन उनके साथ अजित पवार की जुगलबंदी ऐसी थी कि समान विचारधारा वाले एकनाथ शिंदे भी असहज हो जाते थे। यहां तक कि अजित पवार का कद ऐसा बढ़ा कि जब वह चाचा शरद पवार से अलग हुए तो भी कमजोर नहीं हुए। विधानसभा चुनाव में 40 से ज्यादा सीटें हासिल करके दिखा दिया कि उनके पास कितना दमखम है। 1991 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था। तब से अब तक 35 साल के राजनीतिक करियर में अजित पवार का यह संघर्ष चाचा की छाया और अपनी खुद की पहचान बनाने की ललक के बीच रस्साकशी का रहा है। 1959 में जन्मे अजित पवार के पिता अनंतराव पवार थ...
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