चंदौली, फरवरी 20 -- सकलडीहा, हिन्दुस्तान संवाद। परंपरागत माटी कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं। इसके लिए कारीगरों को इलेक्ट्रानिक चाक से लेकर अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। ताकि उन्हें घर पर ही रोजगार के अवसर मिल सकें और इस परंपरा को भी जीवित रखा सके। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से जागरूक भी किया जाता है। मगर कारीगारों के सामने एक बड़ी समस्या है मिट्टी की। मिट्टी की कमी के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ रही। व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले तो मिट्टी ही नहीं मिल रही है। जहां मिल रही है वहां से घर तक लाने में काफी महंगा पड़ रहा है। एक ट्रैक्टर ट्राली मिट्टी लाने में तकरीबन तीन हजार रुपये का खर्च पड़ रहा है। जो काफी महंगा पड़ रहा है। सरकार को चाक के साथ सस्ती मिट्टी का भी इंतजाम कराना चाहिए। जिससे रोजगार...
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