उन्नाव, दिसम्बर 26 -- उन्नाव। चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल ने सर्राफा बाजार को हिला कर रख दिया है। एक साल पहले 95 हजार रुपये किलो बिकने वाली चांदी अब दो लाख रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने न केवल पारंपरिक आभूषण खरीदना मुश्किल बना दिया है, बल्कि मध्यम वर्ग की घर-परिवार से जुड़ी रीतियों और उपहारों की परंपरा पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। भारतीय संस्कृति में चांदी का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। जन्म से लेकर विवाह तक हर रस्म में इसका प्रतीकात्मक महत्व है। लेकिन मौजूदा हालात में इसकी "चमक" आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर होती जा रही है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की मांग बढ़ने के साथ घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों ने रफ्तार पकड़ ली। कुछ ही महीनों के भीतर करीब दोगुनी हुई दरों ने पारंपरिक...