काबुल, सितम्बर 11 -- पिछले महीने यानी 7 अगस्त को मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर दस्तखत किए थे। इसे मक्का पैक्ट और इस्लामिक नाटो कहा गया। इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि तीनों में से किसी भी एक सदस्य देश पर किसी तरह का हमला उन तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते की यह शर्त नाटो के अनुच्छेद-5 जैसा है, इसीलिए इसी तीम मुस्लिम देशों का इस्लामिक नाटो कहा गया। अब जब सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोही हमला बोल रहे हैं तो पाकिस्तान यमन और हूतियों पर हमले करने से कतरा रहा है। उसे डर है कि ऐसा करने से ईरान नाराज हो जाएगा। लिहाजा, इस्लामिक नाटो का गुब्बार महीने भर के अंदर फूटता नजर आ रहा है और सदस्य देशों के बीच दरार आती दिख रही है। इसे एक और कदम से समझा जा सकता है कि इसी हफ्ते सऊदी अरब ने पाकिस्...