चम्पावत, अप्रैल 24 -- सतीश जोशी, चम्पावत। जनपद में ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में उत्तराखंड शासन की मंशा अनुसार अब जनपद के प्राचीन धारे-नौलों का सुनियोजित कायाकल्प किया जाएगा। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) के माध्यम से राज्य में प्राकृतिक जल स्रोतों एवं वर्षा आधारित नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए संचालित अभियान के तहत इन पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य केवल संरचनात्मक जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके कैचमेंट एरिया के वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से जल स्रोतों की सततता और जल स्तर की स्थिरता सुनिश्चित करना भी है। यह भी पढ़ें- जिला योजना में सामान्य मद में इजाफा किया
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