चतरा के फांसी तालाब का ऐतिहासिक महत्व
चतरा, मई 22 -- चतरा संवाददाता चतरा की धरती1857 की क्रांति के सबसे निर्णायक और रक्तरंजित अध्यायों में से एक है। चतरा का युद्ध (2 अक्टूबर 1857) रामगढ़ बटालियन के लगभग 3000 क्रांतिकारी सूबेदार जयमंगल पांडे और नादिर अली खान के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे। इस एक घंटे की लड़ाई में लगभग 150 क्रांतिकारी और 56 अंग्रेज व सिख सैनिक मारे गए थे। अंग्रेजों ने शहीद हुए भारतीय क्रांतिकारियों के शवों को एक बड़े गड्ढे में दफना दिया था। सूबेदार जयमंगल पांडे और नादिर अली की फांसी: युद्ध के बाद सूबेदार जयमंगल पांडे और नादिर अली खान को गिरफ्तार कर लिया गया। यह भी पढ़ें- चतरा के ऐतिहासिक स्थलों का डीसी ने लिया जायजा, कहा होगा सौंदर्यीकरण कमिश्नर सिम्पसन के आदेश पर 4 अक्टूबर 1857 को चतरा के इसी फांसीहारी तालाब के किनारे एक आम के पेड़ से लटकाकर उन्हें फा...
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