कौशाम्बी, जून 18 -- नेवादा निवासी चचेरे भाइयों की मौत से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन बच्चों के शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रो रहे थे। इनकी हालत देखने और ढाढ़स बंधाने वालों की भी आंखें नम थीं। हर जुबान पर गुस्सा था। लोग बालू माफिया और प्रशासन को कोस रहे थे। चचेरे भाई आदित्य और दीपांशु पर अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजन नजर रखते थे। उनको गलती से भी बालू भंडारण की ओर नहीं जाने दिया जाता था। गुरुवार की सुबह आदित्य के पिता राकेश व मां मनीता देवी दवा लेने प्रयागराज चले गए थे। घर पर मौजूद परिवार के अन्य सदस्य आदित्य को देख नहीं पाए। मौका पाकर वह दीपांशु के साथ मौत के गड्ढे की ओर चला गया। वहीं, दीपांशु के पिता राजेश भी खुद की दवा लेने के लिए मंझनपुर गए थे। घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के माता-पिता भागे-भागे घटना स्थल पर पहुंचे। ...