चंपत राय की छाया से मुक्त नहीं हो पाया राम मंदिर ट्रस्ट, बदलाव में रणनीति की छाप दिख रही
अयोध्या, सितम्बर 3 -- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए हलछठ की तिथि यादगार बन गई। इस दिन ट्रस्ट की संरचना और जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव हुआ। कयासों के विपरीत पूर्व महासचिव चंपत राय की वापसी नहीं हुई, लेकिन नए ट्रस्टियों के चयन और पदाधिकारियों के दायित्वों में बदलाव में उनकी संगठनात्मक रणनीति की छाप जरूर दिखाई दी। राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद शुरू से प्रमुख भूमिका में रही है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय ने संघ परिवार के विभिन्न घटकों के बीच समन्वय बनाए रखने की कोशिश की। चढ़ावा चोरी के प्रकरण के बाद चंपत राय को महासचिव पद से हटना पड़ा। हालांकि, ट्रस्ट से बाहर रहते हुए भी संगठन में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चाएं बनी रहीं। नए ट्रस्टियों के चयन में अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्...
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