कमलाकांत सुंदरम अयोध्या, जुलाई 8 -- अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी का मामला विपक्ष के हाथों में आने से पहले ही रोका जा सकता था। अखिलेश यादव ने सात जून को पहली बार इसे सोशल मीडिया पर डाला। इससे पहले ही चंपत राय ने पांच जून को चोरी पकड़ ली थी और रुपये भी पुलिस की मदद से बरामद कर लिए थे। अब चंपत राय उस उस खास समय को कोस रहे होंगे। जब उन्होंने चढ़ावा चोरी के आरोपियों से चोरी की धनराशि की बरामदगी कर लेने के बाद भी एफआईआर दर्ज कराने से खुद को रोक लिया। थाने की ओर बढ़ चुके उनके कदम आखिर किसके दबाव में वापस मंदिर की ओर लौट गए, इसका पता अब तक नहीं चल सका है। यदि उस दिन मुकदमा दर्ज हो जाता तो किसी तरह का बखेड़ा नहीं खड़ा होता। त्वरित कार्रवाई पर इतना बड़ा उलटफेर नहीं होता। उन्हें गुमनामी में जाने की जरूरत भी नहीं रहती। बीते छह सालों तक जिस ऐतिहासिक...