नई दिल्ली, मार्च 3 -- Lunar Eclipse 3 March 2026: हिंदू धर्म में सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद करने की परंपरा सदियों पुरानी है। 3 मार्च 2026 को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण के अवसर पर यह सवाल फिर से चर्चा में है कि आखिर ग्रहण के समय मंदिरों के द्वार क्यों बंद किए जाते हैं? यह परंपरा केवल रूढ़िवाद नहीं, बल्कि वैदिक साहित्य, पुराणों और धर्मशास्त्रों में वर्णित शुद्धि, सूतक और आध्यात्मिक सावधानी से जुड़ी हुई है। आइए विस्तार से समझते हैं इसके पीछे के प्रमुख कारण और शास्त्रीय आधार।सूतक काल और अशुद्धि की मान्यता ग्रहण काल को शास्त्रों में 'सूतक' का समय कहा गया है। सूतक वह अवधि है जब पूजा-अर्चना, भोग लगाना, मूर्ति स्पर्श और अन्य बाह्य धार्मिक कर्म वर्जित हो जाते हैं। चंद्र ग्रहण में सूतक नौ घंटे पहले और सूर्य ग्रहण में बारह घं...
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