हाथरस, अप्रैल 14 -- सासनी। क्षेत्र के गांव निनामई में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन आचार्य चंद्रेश जी महाराज ने कृष्ण- सुदामा मित्रता, कृष्ण रुक्मणि विवाह , कंस वध की कथा सुनाई। उन्होंने ने कहा कि दुष्ट के किये गये पाप जब पूर्ण हो जाते हैं, तो उसका अंत निश्चित है। भगवान कृष्ण द्वारा कंस का किया गया वध ऐसा ही था। उन्होंने कहा कि ब्रज प्रेम की भूमि है जो सभी का कल्याण करती है। कहा कि जब मनुष्य भगवान के विरह में आंसू बहाता है तभी ईश्वर प्रेम की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि कृष्ण- सुदामा मित्रता की प्रेम कहानी श्रेष्ठ प्रेम को दर्शाता है। यह भी पढ़ें- जीवन में मित्रता श्रीकृष्ण-सुदामा की तरह करें : मां चैतन्य मीरा इसके साथ ही कृष्ण और रूक्मणी विवाह की झांकी सहित कृष्ण व सुदामा की मित्रता की भव्य झांकी भी प्रस्तुत की गई। ...