नई दिल्ली, सितम्बर 24 -- भारतीय चुनाव आयोग का एक बार फिर गंभीर विवादों में उलझना अफसोसजनक है। आयोग पर आलोचनाओं की बौछारें हो रही हैं। विपक्ष तरह-तरह के आरोपों के साथ जिस तरह से आक्रामक हुआ है, उसे समझना कठिन नहीं है। मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद की एक बड़ी वजह है और बीते महीनों में इससे जुड़े करीब 40 ऐसे फैसले हैं, जिनसे आयोग के कामकाज में बदलाव आए होंगे। आयोग में आयुक्तों के बीच परस्पर समन्वय के अभाव से चिंता बढ़ गई है। हालांकि, जब किसी आयोग में तीन सदस्य होंगे, वहां असहमति की आशंका से कभी इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त में इतनी व्यावहारिक बढ़त होती है कि वह आयोग के फैसले को अपने ढंग से प्रभावित कर सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भी कुछ फैसलों को प्रभावित किया हो, तो आश्चर्य नहीं। अब जब अनेक शिकायतें ...