विशेष संवाददाता, फरवरी 21 -- लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय और प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में यात्रियों की अनुमानित संख्या और वास्तविक संख्या के बीच बड़े अंतर के साथ-साथ करोड़ों रुपये के भुगतान और वसूली में गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिलाया गया है।सीएजी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक 38.66 लाख यात्रियों के सफर का अनुमान लगाया गया था, लेकिन वास्तविक रूप से केवल 2.70 लाख यात्रियों ने ही मेट्रो सेवा का उपयोग किया। अनुमान से काफी कम यात्री मिलने के कारण मार्च 2019 से 2023-24 तक परिचालन से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सका है।ठेकेदारों को करोड़ों का फायदा रिपोर्ट ...
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