नई दिल्ली, अगस्त 15 -- हिंदू धर्म शास्त्रों में सूतक और पातक को विशेष महत्व दिया गया है। घर में बच्चे का जन्म होने या किसी सदस्य की मृत्यु होने पर एक निश्चित अवधि तक पूजा-पाठ और शुभ कार्य बंद रहते हैं। इस समय को अशुभ माना जाता है। शुद्धिकरण के बाद ही परिवार सामान्य पूजा फिर से शुरू कर सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं इन नियमों को।सूतक क्या होता है? जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो सूतक काल लग जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। सूतक की अवधि आमतौर पर दस से बारह दिन तक मानी जाती है। इस समय घर में अशुद्धि का भाव रहता है। अवधि पूरी होने के बाद नामकरण संस्कार कराया जाता है और गंगाजल छिड़ककर घर का शुद्धिकरण किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद ही पूजा फिर से शुरू की जा सकती है।पातक क्या होता है? परिव...