नई दिल्ली, अगस्त 1 -- 80 के दशक का आखिरी दौर। तमिलनाडु की राजधानी मद्रास (अब चेन्नई) की रातें शांत हुआ करती थीं, लेकिन थिरुवान्मियूर इलाके की तंग गलियों में एक ऐसा खौफ पनप रहा था जिसने पूरे दक्षिण भारत की नींद उड़ा दी। सड़कों पर पीले-काले रंग का एक ऑटो दौड़ता था, जिसे देखकर लगता था कि इसमें कोई मामूली सवारी जा रही है। लेकिन उस ऑटो के पीछे छुपा था अवैध शराब, देह व्यापार और कत्ल का एक ऐसा साम्राज्य, जिसका सरगना था गौरी शंकर उर्फ 'ऑटो शंकर'। साल 1988 से 1989 के बीच मद्रास से अचानक लड़कियां गायब होने लगीं। किसी को नहीं पता था कि वे कहां जा रही हैं। जब इस गुत्थी से पर्दा उठा, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। ऑटो शंकर और उसके गिरोह ने दो सालों में 6 मासूम महिलाओं का अपहरण कर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। शवों को ठिकाने लगाने का तरीका इतना बर्बर था क...