अलीगढ़, नवम्बर 27 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। कॉलोनियों में अस्पताल नहीं, जोखिम की नई रिहायश तैयार हो गई है। जहां घरों की खिड़कियां खुलनी थीं, वहां गैरेज जैसे ओपीडी और बेसमेंट में जुगाड़ आईसीयू चल रहे हैं। संकरी गलियों में एंबुलेंस घुस नहीं सकती, फिर भी यहां ऑपरेशन और भर्ती जारी हैं। बिना लाइसेंस स्टाफ से इलाज व विशेषज्ञों को ऑन कॉल बुलाने की मजबूरी मरीजों की जिंदगी पर सीधा खतरा बन चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण की खानापूर्ति ने इन अस्पतालों को 'जो चाहे करो' की खुली छूट दे दी है। कॉलोनियों में तेजी से उभर रहे छोटे-छोटे निजी अस्पताल अब स्वास्थ्य सेवा से ज्यादा जोखिम का केंद्र बनते जा रहे हैं। शहर के कई रिहायशी इलाकों में ऐसे 'गैरेजनुमा' मेडिकल सेंटर खुले हैं, जहां न इन्फ्रास्ट्रक्चर का मानक फिट बैठता है, न सुरक्षा की बुनियादी व्यवस्...
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