कौशाम्बी, मई 3 -- कच्चे घरों को सजाने-संवारने के लिए मोटी रकम खर्च नहीं होती है। पीली मिट्टी व गेरू 15 रुपये किलो मार्केट में मिल रही है। थोक में लेने पर यह और सस्ती पड़ जाती है। रविवार को चक थांभा में हुए हादसे में तीन लोगों ने पीली मिट्टी के चक्कर में जान गंवाई है। लोगों का मानना है कि पीली मिटटी बिकती नहीं है, जबकि यह अधिकतर दुकानों में उपलब्ध है। कच्चे घरों को सजाने व संवारने के लिए जान जोखिम में डालने की आवश्यकता नहीं है। पीली मिट्टी व गेरू मार्केट में उपलब्ध है। फुटकर में यह 15 रुपये किलो बेची जा रही है। जबकि थोक में और भी सस्ती मिलती है। बोरी में दुकानदार इसको बेचते हैं। बारिश के बाद इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। रविवार को चकथांभा में हादसा हुआ तो सवाल यही उठा कि आखिर इसके लिए इतना जोखिम उठाने की क्या जरूरत थी। जब मार्केट में पीली म...
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