पाकुड़, दिसम्बर 1 -- राजाओं के शासनकाल के समय से प्रखंड मुख्यालय में बुधवार और शनिवार को लगने वाला साप्ताहिक हाट, न सिर्फ आमलोगों के लिए सब्जी सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी करने का स्थल ही नहीं है। वरन् आमलोगों के साथ-साथ विशेषकर आदिवासी समुदाय की महिलाओं व युवतियों के लिए झारखण्ड की ग्रामीण संस्कृति और जीवंत परंपरा की मिसाल भी साबित होता रहा है। जहां हर सप्ताह सैकड़ों परिवार अपनी रोजी-रोटी और उम्मीदें लेकर जुटते हैं। समय बदलने के साथ भले ही साप्ताहिक हाट का स्वरुप बदला हो, लेकिन सप्ताह में दो दिन लगने वाला साप्ताहिक हाट अब भी पुराने अंदाज और अपनी रौनक के साथ लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है। दो दिन लगने वाला यह साप्ताहिक हाट सिर्फ व्यापार का स्थान नहीं है। बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। लोग साप्ताहिक हाट ...
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