बोकारो, अप्रैल 7 -- पेटरवार, प्रतिनिधि। मध्य पूर्व जंग के बीच हुई रसोई गैस की किल्लत से शहर तो शहर गांवों के लोग भी अछूते नही है, लेकिन गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी प्लस पॉइंट यह है कि गांव के लोग लकड़ी, गोइठा जलाकर दो वक्त का भोजन तैयार कर लेते हैं। गांवों के लोगों को लकड़ी आसानी के साथ उपलब्ध हो जाती है। गौरतलब है कि पेटरवार प्रखंड के कई पंचायत जंगलों से घिरा हुआ है। घर की महिला हो या पुरुष जंगलों में जाकर सुखी लकड़ी लाकर इंधन तैयार किया करते हैं और तब उन्हें दो वक्त का भोजन मिल पाता है। पेटरवार के दर्जनों होटल कॉमर्शियल गैस के अभाव में कोयला पर आश्रित हो गए है। होटलों में कोयला की मांग तेजी से बढ़ने के कारण आम लोगों को जलाने के लिए कोयला नही मिल पा रहा है, जिसके कारण जहां-तहां, जंगल आदि स्थानों से महिलाएं लकड़ी चुनकर ले जाती ह...