समस्तीपुर, अप्रैल 4 -- रोसड़ा। अनुमंडल क्षेत्र में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच अब ग्रामीण इलाकों की रसोई में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले केवल शहरों तक सीमित इंडक्शन व इलेक्ट्रिक चूल्हों का उपयोग होता था, वहीं अब गांवों में भी लोग तेजी से इन विकल्पों को अपना रहे हैं। गैस की समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण मजबूरी में लोग इलेक्ट्रिक चूल्हा या जलावन पर खाना बनाने लगे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गैस एजेंसियों में एलपीजी की उपलब्धता की कमी नहीं बताई जा रही है, लेकिन उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचने में देरी से समस्या उत्पन्न हो रही है। गैस बुकिंग के नियमों में बदलाव के बाद शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों के बाद ही दोबारा बुकिंग की अनुमति मिल रही है। इसके साथ ही डीसीए नंबर जनरेट होने के बाद ह...
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