ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- हिमांशु, एसोशिएट प्रोफेसर, जेएनयू भारत के अधिकांश ग्रामीण गरीबों की आर्थिक स्थिति को समझने का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है, गांवों में मिलने वाली मजदूरी। कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से गहरे जुड़े होने के कारण ग्रामीण मजदूरी देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संकट को दर्शाने वाले उन चुनिंदा संकेतकों में से एक है, जिनके आंकड़े लगातार उपलब्ध होते रहे हैं। श्रम ब्यूरो द्वारा साल 1998 से ही हरेक महीने 12 कृषि और 13 गैर-कृषि व्यवसायों के आंकड़े जारी किए जाते रहे हैं। जुलाई 2025 से इस शृंखला में बदलाव किया गया। श्रम ब्यूरो ने वेतन डाटा इकट्ठा करने और रिपोर्ट के दायरे एवं तरीके (मेथडोलॉजी), दोनों में बदलाव किए। इस बदलाव के तहत गांवों की संख्या बढ़ाई गई है और इसे कृषि मजदूरों के लिए संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआईएएल) से भ...
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