बांदा, फरवरी 12 -- बांदा। संवाददाता गजहाडेरा एक ऐसा नाम है जहां इस पुरवा के अलावा बाहरी व्यक्ति आने-जाने में सहम जाएं। जरा सी चूक हुयी कि केन नदी में डूबना तय है। तहसील के खप्टिहाकला गांव में ग्राम प्रधान ने संचालित गौ संरक्षण केंद्र की दूरी कस्बे से तीन किलोमीटर दूर गजहाडेरा में संचालित कर रखा है। यहां तक पहुंचाने का तीन किलोमीटर का मार्ग अत्यंत ही दुर्गम एवं खतरे से भरा है। केन नदी के टीले से होते हुए गौशाला तक के इस दुर्गम रास्तों से जानवरों को लाना और ले जाना एक कठिन है। इसी गौशाला के आगे लगभग डेढ़ सौ 200 परिवारों का एक छोटा सा पुरवा है। पुरवावासी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। इस रास्ते में जरा सी चूक किसी की भी जान ले सकती है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.