वाराणसी, फरवरी 24 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। शिव-गौरा विवाह परंपरा का भावपूर्ण अध्याय मंगलवार को साकार हुआ। माता गौरा के गौने की परंपरागत हल्दी रस्म टेढ़ीनीम स्थित 'गौरा सदनिका' में विधि-विधान से संपन्न हुई। 108 थालों में भोग के साथ नौ गौरी-नौ दुर्गा के आवाहन मंत्रों से अभिमंत्रित हल्दी माता की चल प्रतिमा पर अर्पित की गई तो परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय गौरा' के घोष से गूंज उठा। मानों तीनों लोक निहाल हो गए। गौने की हल्दी की परंपरा के अनुसार मंगलवार प्रातः काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान हुआ। वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रों के बीच हल्दी का विधिवत पूजन किया। मंदिर के महंत कौशल द्विवेदी ने बताया कि काशी की लोकपरंपरा के अनुसार गौरा के गौने की जिम्मेदारी स्वयं काशीवासियों की होती है। पूजन के बाद महंत पं. कौशल द्विवेदी के साथ पं. ...