इटावा औरैया, मई 10 -- भरथना। क्षेत्र के जाहरवीर मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य जुगेंद्र शास्त्री एवं नीलम शास्त्री ने गोवर्धन पूजा की कथा का वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि ब्रजवासी प्रत्येक वर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि इंद्र नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत, गौ माता और प्रकृति ही जीवन का आधार हैं। भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ कर दी। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने ब्रज में मूसलाधार वर्षा कर विनाश मचाने का प्रयास किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों और गौवंश की रक्षा की। यह भी पढ़ें- श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण के जन्मोत्सव का वर्णन सात दिनों तक सभी लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे सुरक्षित र...