पीलीभीत, अप्रैल 19 -- नगर के शेरों वाली मठिया के समीप श्री ब्रह्मदेव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिन श्री गिरिराज जी महाराज की कथा का वर्णन किया गया। प्रभु श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को सुनाया गया। श्री वृंदावन धाम से पधारे ब्रजवासी रासबिहारी लाल व्यास श्री गोकुल ठाकुर जी महाराज ने श्री गिरिराज जी की कथा में बताया की गोवर्धन पर्वत, जिसे गिरिराजजी के नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान कृष्ण की लीलास्थली है। जिन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए इस पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाया था। जब हनुमान व्रज में थे। जहाँ आज भी गोवर्धन विराजमान हैं। तभी रामचन्द्र का यह संदेश उन्हें मिला। इसलिए हनुमान जी ने गिरिराज-गोवर्धन को वहीं रखा और प्रभु श्री राम के पास लौट आए। उसी समय से गोवर्धन वहाँ विराजमान हैं। गोवर्ध...