गोड्डा, सितम्बर 7 -- गोड्डा एक प्रतिनिधि। गोड्डा समेत पूरे संथाल परगना में वज्रपात हर साल जानलेवा है। संथाल परगना के गोड्डा, दुमका, देवघर, साहिबगंज और पाकुड़ जिले वज्रपात और आंधी-तूफान के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में माना जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र गोड्डा के कृषि मौसम वैज्ञानिक रजनीश प्रसाद राजेश नें बताया की बरसात में खासकर मानसून के दौरान यहां अचानक मौसम बदलने, तेज गरज चमक और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। मौसम की इन घटनाओं के पीछे क्षेत्र की भौगोलिक बनावट, वातावरण में नमी, हवाओं का टकराव और मानवीय गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में खेती पर निर्भरता और सुरक्षित आश्रय की कमी के कारण वज्रपात से जान-माल के नुकसान का खतरा और बढ़ जाता है। हर वर्ष वज्रपात की वजह से कई इंसान और मवेशी की मौत ग...