लखनऊ, मार्च 14 -- नवाबों के शहर लखनऊ में रमजान की रौनक हर गली और मोहल्ले में सिर चढ़कर बोलती है। यहां की सामूहिक रोजा इफ्तार की परंपरा न सिर्फ इबादत का हिस्सा है, बल्कि यह आपसी मेलजोल और भाईचारे का भी प्रतीक रही है। अमूमन रमजान के दौरान शहर का हर कोना रोशन होता था, लेकिन इस बार गैस के गंभीर संकट से सामूहिक रोजा इफ्तार में कमी देखने को मिल रही है। आमतौर पर रमजान के दिनों में शहर के हर मोहल्ले में कम से कम दो से तीन बड़े सामूहिक इफ्तार आयोजित किए जाते थे। लेकिन इस बार वह चहल पहल नदारद रही। राजधानी में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत और घरेलू गैस की आपूर्ति में आ रही बाधाओं ने आयोजकों के हाथ बांध दिए हैं। एक बड़े सामूहिक इफ्तार में कम से कम पांच से छह सिलेंडरों की जरूरत होती है, जबकि मौजूदा हालात में एक सिलेंडर का इंतजाम करना भी टेढ़ी खीर साबित...
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