लखनऊ, मार्च 14 -- जंग की तपिश -ईद के पकवान के लिए बची रहे गैस इसलिए इफ्तार का दस्तरख्वान बदलालखनऊ, कार्यालय संवाददातानवाबों के शहर लखनऊ की गलियों में इफ्तार और सहरी की रौनक अपनी साख के लिए जानी जाती है, लेकिन इस साल रसोई गैस की बचत और बढ़ती महंगाई ने दस्तरख्वान की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। ईद की तैयारियों के लिए बजट और गैस बचाने की चिंता में अब घरों से पारंपरिक पकवानों की खुशबू कम होने लगी है।चिनहट की रहने वाली शहाना बिलाल किदवई ने बताया कि पहले इफ्तार के समय रसोई में घंटों तक पकौड़ियां, समोसे और चना-चाट तैयार होती थी, जिसमें गैस की भारी खपत होती थी। शहाना ने कहा, अब हमने तली-भुनी चीजों से किनारा कर लिया है। गैस बचाने के चक्कर में अब दस्तरख्वान पर पकौड़ियों की जगह तरबूज, पपीता और केले जैसे मौसमी फलों ने ले ली है। इससे न केवल सेहत ठीक रहती ...