सिमडेगा, मार्च 22 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। शहर में रसोई गैस की किल्लत ने एक बार फिर आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को आधुनिक गैस चूल्हे छोड़कर फिर से पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर छात्र-छात्राओं और युवाओं को इससे सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। रविवार को स्कूल और कॉलेज बंद रहने के कारण डेरा एवं हॉस्टल में रहने वाले कई युवा अपने-अपने घर लौटे। साथ ही युवाओं को सुबह से ही जलावन की लकड़ी जुटाते में लगे रहे। ताकि किसी तरह खाना बनाया जा सके। युवाओं ने बताया कि गैस नहीं मिलने से उनकी परेशानी कई गुना बढ़ गई है। जहां गैस चूल्हे पर खाना बनाना आसान और समय बचाने वाला होता है। वहीं चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय और मेहनत लगती है। इससे पढ़ाई और अन्य जरूरी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इध...