बागपत, मार्च 28 -- घरेलू गैस न मिलने के कारण चूल्हों पर खाना पकाना अब लोगों की मजबूरी बन गया है। इंडक्शन चूल्हे बाजार में नहीं मिल रहे हैं। इसलिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में लकड़ी-उपले ही एकमात्र सहारा हैं जिसके चलते चूल्हे-कंडे का दौर एक बार फिर लौट आया है। एक समय था जब घरों में मिट्टी के चूल्हे और लकड़ी की आंच पर पूरे परिवार का खाना बनता था, लेकिन वर्तमान समय में लगभग हर घर में एलपीजी गैस पर खाना बनता है। ग्रामीण इलाकों में जहां पहले हर घर में गैस चूल्हा प्रमुख माध्यम बन चुका था, वहीं अब लोग फिर से मिट्टी के चूल्हे, लकड़ी और गोइठा का सहारा लेने लगे हैं। कई घरों में गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है, जिससे मजबूरी में पारंपरिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। जिन परिवारों के पास गैस उपलब्ध भी है, वे भी भविष्य की अनिश्चित स...
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