प्रयागराज, मई 12 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के गैंगरेप के एक मामले के तीन आरोपियों को बरी किया है। तीनों 1984 में सात-सात की सजा हुई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने संदेह के लाभ में दिया। कोर्ट ने पाया कि एफआईआर दर्ज करने में बिना किसी वजह देरी हुई और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की पूरी तरह कमी है। कोर्ट ने एफआईआर को अस्पष्ट भी बताया क्योंकि पीड़िता के साथ चार लोगों द्वारा रेप का आरोप था और एफआईआर में सिर्फ तीन लोगों के नाम थे। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से यह भरोसा नहीं होता कि आरोपियों ने रेप किया क्योंकि अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्ष और दस्तावेजी सबूतों से रेप के अपराध में आरोपी अपीलार्थियों की संलिप्तता साबित नहीं होती। कोर्ट ने यह भी कहा कि सात माह की गर्भवती महिला के साथ चार लोगों ने एक घं...