किशनगंज, अप्रैल 13 -- टेढ़ागाछ, एक संवाददाता टेढ़ागाछ प्रखंड में धान के बाद गेहूं मुख्य फसल है। लेकिन धान की तरह ही गेहूं की खेती भी अब यहां के किसानों के लिए चुनौतियों भरी साबित हो रही है।बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में बिचौलियों का कब्जा किसानों की कमर तोड़ रहा है। इस कारण अब कई किसान गेहूं की जगह मक्के की खेती का चुनाव करने लगे हैं। स्थानीय किसान बताते हैं कि एक बीघा गेहूं उगाने में अब लगभग 10,000 से 12,000 रुपये तक का खर्च आता है। इसमें खेत की बार-बार जुताई (लगभग 2000 रुपये), महंगे हाइब्रिड बीज और खाद ( लगभग 5,000 रुपये) और पटवन व कटाई की मजदूरी ( लगभग 3,500 रुपये) शामिल है। लगभग पांच महीने की कड़ी मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तो बाजार की अनिश्चितता किसानों को डराने लगती है। सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषि...