औरंगाबाद, अप्रैल 13 -- कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है और इन दिनों हार्वेस्टिंग का कार्य जोर-शोर से जारी है। खेतों में दिन-रात हार्वेस्टर चल रहे हैं और किसान समय रहते अनाज को सुरक्षित घरों तक पहुंचाने में जुटे हैं। हार्वेस्टिंग के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष बच जा रहा है। जिन किसानों को मूंग या अन्य फसलों की बुवाई करनी है, वे खेत खाली करने के लिए अवशेष जला रहे हैं, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और आग लगने का खतरा भी बना रहता है। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. अनूप चौबे के अनुसार फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है, सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं और जैविक कार्बन की मात्रा घटती है, जिससे भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है। यह भी पढ़ें- सारण में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेक...
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