रांची, मार्च 21 -- सोनाहातू,प्रतिनिधि। दानाडीह क्रिकेट मैदान में आयोजित तीन दिनी सुखद सत्संग के दूसरे दिन शनिवार को राष्ट्रीय संत असंग देव जी ने कहा कि गृहस्थ जीवन ही त्याग, संयम और सेवा का मार्ग है। आदर्श गृहस्थ वही है, जो अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार होने के साथ-साथ सत्य,धर्म और सदाचार का पालन करे। उन्होंने यह भी बताया कि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए व्यक्ति भगवान का स्मरण, सत्संग और अच्छे कर्मों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है। सब्र, संतोष, बाणी और मन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन चारों का संतुलन ही सुखी जीवन की कुंजी है। उन्होंने कहा कि सब्र यानी धैर्य व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर बनाए रखता है। संत जी ने कहा कि जो व्यक्ति सब्र, संतोष, मधुर वाणी और नियंत्रित मन को अपने जीवन में अपनाता है, वही सच्चे अर्थों...