गृहस्थ आश्रम बंधन नहीं, भगवान की साधना का अवसर
भभुआ, अगस्त 25 -- बोले जीयर स्वामी, कर्तव्य निभाते हुए भक्ति करना ही मानव जीवन का सार प्रवचन सुनने के लिए कई गांवों के महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे परसियां (पेज चार) भभुआ, नगर संवाददाता। सदर प्रखंड के परसियां के पास चातुर्मास स्थल पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने मानव जीवन, गृहस्थ धर्म, वैराग्य और भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
गृहस्थ जीवन का महत्व उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम बंधन नहीं है। यह भगवान की साधना का अवसर है। संसार में मिलने वाले सुख और आध्यात्मिक आनंद को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। सांसारिक आनंद का अनुभव करने वाला ही उसे समझ सकता है। परमात्मा की भक्ति में मिलने वाले आनंद की अनुभूति भी साधना करने वाला ही कर सकता है। स्वामी जी ने कहा कि प्रियव्रत के मन ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.