पाकुड़, जुलाई 7 -- महेशपुर। अल-नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक कृषि कार्यों की जानकारी एवं कृषकों के बीच जागरूकता लाने के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची द्वारा मंगलवार को ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से झारखंड के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़ने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र महेशपुर-पाकुड़ में वैज्ञानिक एवं जिले के कृषकों ने अल-नीनो के प्रभाव के बारे में चर्चा में भाग लिया। कुलपति बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची डॉ़ सुनील चंद्र दुबे, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ़ डीके शाही एवं सह निदेशक प्रसार शिक्षा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची डॉ़ निरंजन लाल ने किसानों को संबोधित किया और कम वृष्टि में अरहर, मूंग, उड़द, कुरथी जैसे दलहन फसल तथा मड़ुआ, बाजरा, कम अवधि के धान (सहभागी धान, आईआर-64 डीआरटी, सीआर-320 आदि...