गुस्सा वही, जो देश के काम आ जाए
नई दिल्ली, मई 30 -- शक्ति का सदुपयोग होता है और दुरुपयोग भी। पता नहीं क्यों, शक्ति का दुरुपयोग युवाओं को ज्यादा और जल्दी आकर्षित करता है। शहर हो या गांव बड़ी संख्या में ऐसे युवा मिल जाते हैं, जो ऊर्जा और रोष से भरकर कदम उठाते हैं। वे समझ नहीं पाते हैं कि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना-भिड़ना शक्ति का दुरुपयोग है। पंजाब के गांव सेहना में एक युवा सरदार भी शक्ति या ऊर्जा से भरे हुए थे। उन्हें कोई बात पसंद नहीं आती, तो नाराजगी जताने में कभी चूकते नहीं थे। ऐसा हो नहीं सकता कि कोई उन्हें छेड़कर बिना गुस्सा झेले चला गया हो। दिमाग में उबलते रहने वाला गुस्सा नाक पर धरा रहता था और मौका मिलते ही उतरने-बरसने लगता था। मोहल्ले में एंग्री यंगमैन की छवि बन गई थी। तमाम जानने वाले उनसे दो हाथ दूर ही रहते थे। एक दिन खेत से जुड़े मसले पर पड़ोसी से ही झगड़ा हो गया।...
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