वाराणसी, फरवरी 28 -- वाराणसी,अरविंद मिश्र। रंगभरी एकादशी की तिथि। दिन शुक्रवार। शाम के साढ़े चार बज चुके हैं। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास के भूतल पर बने कक्ष में हलचल तेज हो गई है। सफेद धोती और दुपट्टा ओढ़े ब्राह्मणों के समूह में से कुछ लोग बाबा की रजत पालकी का हत्था लगा रहे हैं। दूसरी ओर कुछ ब्राह्मण पालकी में आसन सजा रहे हैं। इस कक्ष से गली की ओर खुलने वाले दरवाजे से झांक कर गोलू महाराज बाहर खड़े पांच डमरू वादकों को बनारसी अंदाज में बता रहे हैं 'गुरु हत्था चढ़ लगल हौ... तोहूं लोग मुसुक चढ़ा ला...।' इशारा पाते ही खचाखच भीड़ से भरे महंत आवास के बाहर डमरू ने गर्जना शुरू कर दी है। जैसे-जैसे गर्जना तेज होती जा रही वैसे-वैसे भक्तों का जोश भी उफान मारने लगा है। रजत पालकी उठाने से पहले बाबा के राजसी ठाट की झलक पाने की चाह लिए महिलाएं-पुरुष अब भी कक्ष में...
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