गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण ही सच्चे शिष्यत्व का आधार: स्वामी निरंजनानंद
मुंगेर, जुलाई 29 -- मुंगेर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। पादुका दर्शन आश्रम में चल रहे चार दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तीसरे दिन का शुभारंभ वैदिक शांति पाठ से हुआ। इसके बाद गुरु वंदना, सतगुरु गायत्री पाठ, महामृत्युंजय मंत्र के सामूहिक जप से हुआ। परमाचार्य स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि, जब शिष्य अहंकार का त्याग कर गुरु की चेतना को अपने भीतर धारण करने का प्रयास करता है, तभी वास्तविक शिष्यत्व की शुरुआत होती है। गुरु की कृपा प्राप्त करने के लिए सेवा, अनुशासन और श्रद्धा के मार्ग पर चलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि, शिष्यत्व का मूल आधार गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण है। उच्च शिष्यत्व केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि गुरु की शिक्षा, चेतना और आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प है। यह भी पढ़ें- Guru Purnima Wishes 2026: इ...
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