झांसी, फरवरी 3 -- झांसी, संवाददाता। श्री श्री लहर सिद्धपीठ मंदिर पर कलश यात्रा के साथ शुरू हुए शतचंडी महायज्ञ, संत समागम, रामलीला के तीसरे दिन आस्था का मेला लग गया। मंगलवार बड़ी संख्या में भक्त उमडे़। अध्यक्षता महंत मोहन गिरी महाराज ने की। संत समागम में संत-महंत ने ज्ञान की गंगा बहाई। उन्होंने कहा कि गुरु की महिमा का वर्णन किया। कहा, वह अपरंपार है। सनातन धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी उच्च माना गया है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में अवश्य गुरु बनाना चाहिए। इससे उन्नति रास्ते प्रशस्त होते हैं। गुरु अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु द्वारा बताए मार्ग से मनुष्य का कल्याण संभव है। वह शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि भविष्य, चरित्र का निर्माण करते हैं। मार्गदर्शन और सही-गलत का भेद सिखाकर जीवन को सार्थकता प्रदान करते हैं...