वाराणसी, जुलाई 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गुरु की केवल प्रशंसा या उनके गुणों का वर्णन करने से जीवन नहीं बदलता। वास्तविक श्रद्धा तभी सिद्ध होती है जब गुरु की वाणी को जीवन में उतारा जाए। ज्ञान, चाहे कितना भी व्यापक क्यों न हो, यदि व्यवहार में न आए तो उसका कोई मूल्य नहीं है। ये बातें श्रीसर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष औघड़ बाबा गुरुपद संभव राम ने कहीं। वह गुरुपूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित समारोह के समापन अवसर पर गुरुवार को आशीर्वचन दे रहे थे। यह भी पढ़ें- Chandauli News: शिष्यों में सदाचार और श्रेष्ठ आचरण से प्रसन्न होते हैं गुरूगुरु और सदाचार पड़ाव स्थित आश्रम में हुए सत्र में गुरुपद संभव राम ने कहा कि गुरु की सबसे बड़ी प्रसन्नता अपने शिष्यों की सफलता, सदाचार और श्रेष्ठ आचरण में होती है। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं अपने अंतःकरण का साक्षी है...