प्रयागराज, नवम्बर 28 -- प्रयागराज, संवाददाता। अलोपीबाग स्थित आश्रम में चल रहे आराधना महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास स्वामी श्रवणानंद ने बताया कि गुरु की कृपा से ही शिष्यों की अपनी पहचान बनती है। ईश्वर यानि गुरु की शरण में जाने पर व्यक्ति के सारे अपराध माफ हो जाते हैं। सत्संग में जीवन व्यतीत करने पर परम सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि धन अधिक होने से मन काम, वासना और रजो गुण में लिप्त हो जाता है। धन की अधिकता से पाप बुद्धि प्रभावी हो जाती है। महोत्सव के सुबह के सत्र में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की अगुवाई में संत-महात्माओं ने मैदानेश्वर बाबा की प्रतिमा पर रुद्राभिषेक किया और उनका आशीर्वाद लिया। महोत्सव में स्वामी विनोदानंद, पं. शिवार्चन उपाध्याय, पं. एसपी त्रिपाठी, आचार्य अभिषेक मिश्र, आचार्य मनीष तिवारी...
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