गोंडा, अगस्त 30 -- गोण्डा, संवाददाता। देववाणी संस्कृत की ज्ञानधारा को आगे बढ़ाने वाले गुरु ही कम पड़ जाएं तो सदियों पुरानी परंपरा की लौ मद्धम होना स्वाभाविक है। वेद, उपनिषद, पुराण, दर्शन और भारतीय संस्कृति की विरासत संभालने वाले जिले के संस्कृत विद्यालय आज शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 84 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 32 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 52 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था 28 मानदेय शिक्षकों के सहारे सांस ले रही है। जिले में इंटर स्तर के 20 और हाईस्कूल स्तर का एक संस्कृत विद्यालय संचालित है। नियमानुसार विद्यालयों में एक प्रधानाचार्य और चार शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान है। इन 21 विद्यालयों में दो हजार से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिन्हें संस्कृत व्याकरण, साहित्य, वेद, दर्शन और भ...