रांची, अगस्त 9 -- रांची। झारखंड के दूर-दराज क्षेत्रों की आदिवासी महिलाएं आज सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह से शुरुआत कर इन महिलाओं ने न केवल एककिसान उत्पादक कंपनी (एफपीओ) खड़ी की, बल्कि करीब 2,000 आदिवासी महिला किसानों को संगठित कर कृषि, पोषण, मूल्य-संवर्धन और बाजार से जोड़ने का एक सफल मॉडल भी विकसित किया है। यह भी पढ़ें- आदिवासियों की बदली तकदीर खपरैल घर से शुरू हुई मार्शल बुनकर समिति घाघरा महिला प्रोड्यूसर कंपनी इसी क्रम में गुमला जिले की 'घाघरा महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' का संचालन मुख्य रूप से उरांव जनजाति की महिलाएं कर रही हैं। कंपनी की बोर्ड सदस्य कुंडी देवी बताती हैं कि क्षेत्र की महिलाएं सरसों तो उगाती थीं, लेकिन बाजार में अपनी उपज बेचने के बाद घर के लिए मिलावटी तेल खरीदने को मजबूर थीं। इससे परिवार का ...